Suchnaji

SAIL में 2027 तक 13447 कार्मिक होंगे रिटायर, 23% कार्मिकों की औसत आयु 56 साल

SAIL में 2027 तक 13447 कार्मिक होंगे रिटायर, 23% कार्मिकों की औसत आयु 56 साल
  • सेल में रिटायर होने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों की घटती संख्या को लेकर तनाव का माहौल। हर कोई परेशान।

अज़मत अली, भिलाई। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड-सेल (SAIL) के कर्मचारियों की संख्या लगातार घटती जा रही है। अगले चार साल में कुल 13447 कार्मिक सेवानिवृत होने वाले हैं, जिसमे नॉन एक्स 11583 हैं और शेष अधिकारी। अगले वेज रीविजन तक सेल में मात्र 45000 कार्मिक रह जाएंगे, जिसमे नॉन एक्स की संख्या 37613 रह जाएगी। वर्तमान में कार्मिकों की तुलना में अगले चार में काफी बड़ा अंतर आने वाला है। जबकि रिक्त पदों पर भर्ती का आंकड़ा देखा जाए तो वह काफी कम है।

AD DESCRIPTION R.O. No. 12697/ 111

ये खबर भी पढ़ें:  बधाई हो…! मैत्रीबाग में जन्में 3 White Tiger, रक्षा-सुल्तान ने बढ़ाया सफेद बाघों का कुनबा

AD DESCRIPTION R.O. No.12697/ 111

SAIL के आंकड़ों के मुताबिक वर्तमान में 23% कार्मिकों की औसत आयु 56 साल बताई जा रही है। साल 2026-27 तक ये कार्मिक रिटायर हो जाएंगे। साल 2023-24 में 3537 कार्मिक रिटायर होने वाले हैं। इनमें से 452 अधिकारी और 3085 कर्मचारी होंगे।

इसी तरह 2024-25 में 441 अधिकारी और 2965 कर्मचारियों के साथ कुल 3406 कार्मिक कंपनी की सेवा से रिटायर हो जाएंगे। आंकड़ों के मुताबिक 2025-26 में 3232 कार्मिक सेवानिवृत्त हो जाएंगे। इनमें 2773 कर्मचारी और 459 अधिकारी शामिल होंगे। साल 2026-27 में भी 3272 कार्मिक रिटायर हो जाएंगे। नॉन एक्स इम्प्लाइज की संख्या 2760 और एक्जीक्यूटिव की 512 बताया जा रहा है।

ये खबर भी पढ़ें:Rourkela Steel Plant ने कर दिया ताजमहल का टेंडर…

सेल कर्मचारियों की घटती संख्या को लेकर कर्मचारियों में खासा तनाव का माहौल है। लगातार सुविधाओं में कटौती की वजह से इन कार्मिकों को नुकसान भी हो रहा है। बकाया एरियर आदि को लेकर इन कार्मिकों में काफी तनाव की स्थिति है।

ये खबर भी पढ़ें:  भिलाई और बोकारो में आ रही एक और यूनियन, छत्तीसगढ़ प्लेसमेंट कर्मचारी संघ करेगा भंडाफोड़

दूसरी ओर प्लांट में कम होते मैनपॉवर की वजह से काम का दबाव भी बढ़ता जा रहा है। कम मैनपॉवर के कारण कामकाज को लेकर अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच अक्सर विवाद भी होता है।

कहासुनी आम बात हो चुकी है। नियमित कर्मचारियों और अधिकारियों की संख्या कम होती जा रही है और ठेका मजदूरों की बढ़ती जा रही है। यही वजह है कि प्लांट में असुरक्षित काम का माहौल भी बनता जा रहा है। लगातार हो रहे हादसों में ठेका मजदूर ही अधिकतर चपेट में आ रहे हैं।