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22 साल बाद हाउस लीज की अब रजिस्ट्री, लेकिन पैसा कहां से लाएं…

22 साल बाद हाउस लीज की अब रजिस्ट्री, लेकिन पैसा कहां से लाएं…

अज़मत अली, भिलाई। भिलाई टाउनशिप में लीज पर मकान लेने वालों के सामने बड़ी मुसीबत खड़ी हो गई है। साल 2001 से 2003 के बीच लीज पर मकान दिए गए थे। लेकिन रजिस्ट्री अब कराने की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। शर्त ये है कि वर्तमान संपत्ति दर पर ही रजिस्ट्री होगी। जो मकान 14 लाख में लिया गया था, उसकी कीमत वर्तमान में करीब सवा करोड़ तक पहुंच चुकी है। इसी बढ़ी हुई दर पर रजिस्ट्री होगी।

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रजिस्ट्री का 8 से 12 प्रतिशत का शुल्क वर्तमान दर पर ही सरकार लेगी। इसको लेकर मामला गरमाया हुआ है। राज्य सरकार से मांग की जा रही है कि लीज लेने के वक्त की संपत्ति दर पर रजिस्ट्री कराई जाए। लेकिन, सरकार के नियम के मुताबिक वर्तमान दर पर ही रजिस्ट्री होती है। बीच का रास्ता निकालने या पुरानी दर पर रजिस्ट्री की मांग को लेकर तरह-तरह की बातें सामने आ रही है।


अब सवाल ये खड़ा हो गया है कि नए दर पर रजिस्ट्री कराना काफी महंगा पड़ेगा। इसी को लेकर तनाव का माहौल है। करीब 10 से 12 लाख रुपए तक रजिस्ट्री मद में खर्च करना पड़ सकता है। ये रकम कइयों को अदा करना मुश्किल हो रहा है।

बता दें कि भेंटवार्ता कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कलेक्टर और बीएसपी के डायरेक्टर इंचार्ज अनिर्बान दासगुप्ता को कहा था कि रजिस्ट्री कराइए। इसके बाद ही कलेक्टर की तरफ से बीएसपी को पत्र आया कि रजिस्ट्री कराया जाए। इसके बाद बीएसपी मैनेजमेंट ने लीज धारियों को पत्र देना शुरू किया।

राज्य सरकार के नियम के अनुसार वर्तमान दर पर ही रजिस्ट्री होगी। प्रबंधन करीब 22 साल बाद पत्र देकर यह रास्ता साफ कर दिया है कि मामला हल होगा। लंबित मामले को किसी मंजिल तक लेने का रास्ता भी बन गया है।

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बताया जा रहा है कि 90 हजार से लेकर 14 लाख तक का आवास लीज पर दिया गया था। आज की तारीख में इन संपत्ति की कीमत 10 गुना बढ़ चुकी है। मामले को हल करने के लिएए कैबिनेट से फैसला करना पड़ेगा। केंद्र और राज्य सरकार के बीच का मामला है। खास बात यह है कि शांत मामला था, अब सक्रिय हो गया है। कोई न कोई नतीजा निकलेगा।