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Bhilai Steel Plant: रेल मिल हादसे की और खुली परत, होगा बड़ा एक्शन

Bhilai Steel Plant: रेल मिल हादसे की और खुली परत, होगा बड़ा एक्शन
  • दोपहर 1.30 से 3.00 बजे  तक मैकेनिकल या इलेक्ट्रिकल द्वारा मेंटेनेंस कार्य किया जाता है। इसके लिए कोई शट डाउन नहीं लिया जाता, बल्कि फारबिडेन्स लगाकर कार्य किया जाता है, जिससे सिस्टम बंद हो जाता है।

सूचनाजी न्यूज, भिलाई। रेल मिल फिनिशिंग एरिया (Rail Mill Finishing Area) में घटी दुर्घटना की जांच करने सीटू की केंद्रीय सुरक्षा समिति और सीटू से ज्वाइंट कमेटी फॉर सेफ्टी इन स्टील इंडस्ट्री (Joint Committee for Safety in Steel Industry) के सदस्य घटनास्थल पर पहुंचे। एसपी डे के साथ फिनिशिंग टेल्फर एरिया का दौरा किया गया।

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समिति में जगन्नाथ प्रसाद त्रिवेदी, केवेंद्र सुंदर, अशोक खातरकर, टी जोगा राव, डीवीएस रेड्डी उपस्थित थे। जांच के पश्चात मुख्य महाप्रबंधक से मुलाकात की गई।

यह थी रेल मिल की दुर्घटना

अक्सर दोपहर 1.30 से 3.00 बजे  तक मैकेनिकल या इलेक्ट्रिकल द्वारा मेंटेनेंस कार्य किया जाता है। इसके लिए कोई शट डाउन नहीं लिया जाता, बल्कि फारबिडेन्स लगाकर कार्य किया जाता है, जिससे सिस्टम बंद हो जाता है।

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दुर्घटना के दिन भी हेंडलिग एरिया के रोल टेबल 126 मे टेल्फर 11 के नीचे एक ड्राइव रोलर असेंबली बदलने के लिए कार्य किया जा रहा था और इसी रोल टेबल पर 52 मीटर लंबी रेल कार्यस्थल से चार मीटर पीछे थी, जो कि पहली पाली द्वारा मूवमेंट न होने के कारण रुकी हुई थी। लेकिन मेंटेनेंस कार्य के दौरान रोल टेबल चल जाने के कारण रेल आगे की ओर चल पड़ी। इस रोल टेबल पर राम स्नेही गुप्ता, मान सिंह एव अन्य साथी मजदूर कार्य कर रहे थे, जो रेल कि मूवमेंट को देख नहीं पाए, जिससे रोल टेबल के मध्य में पैर होने के कारण रेल सीधे राम स्नेही गुप्ता के पैर से लगी। वहीं, मान सिंह बचने के लिए कूद गए, जिससे उसके हाथ में फ्रेंक्चर और कुछ अंदरुनी चोट आयी।

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वहीं राम स्नेही गुप्ता के घुटना और टखना के मध्य की हड्डी पूरी तरह से टूट गई। अब ये रोल टेबल कैसे चल गई ये जांच का विषय है?

सुरक्षा में लापरवाही पर होनी चाहिए कठोर कार्यवाही

जांच के पश्चात मुख्य महाप्रबंधक से चर्चा के दौरान सीटू नेताओं ने कहा कि सुरक्षा में की गई लापरवाही काम करने वाले के जान को खतरे में डालता है। इसीलिए सुरक्षा में लापरवाही के लिए दोषी लोगों पर कठोर कार्यवाही होनी चाहिए, ताकि सुरक्षा में लापरवाहियों पर नियंत्रण पाया जा सके। इस पर मुख्य महाप्रबंधक दस्तीदार ने कहा कि जांच चल रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद उचित कदम उठाया जाएगा।

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कार्यक्षेत्र का नहीं लिए गया था शटडाउन

जांच के दौरान यह बात भी सामने आई कि जहां कार्य चल रहा था। वहां का इलेक्ट्रिकल शटडाउन नहीं लिया गया था। शटडाउन न लेने के कई कारण बताए जा रहे हैं, किंतु शटडाउन न लेने अथवा कार्य शुरू करने के पहले फारबिडेन्स न लगाने के कारण ही यह दुर्घटना हुई है।  फारबिडेन्स वह व्यवस्था है, जिसमें शटडाउन लिए बिना ही इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट को ऑपरेशन मोड़ से मेंटेनेंस मोड में रखा जा सकता है।

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संयंत्र में कई जगह फारबिडेन्स लगाकर कार्य करने की व्यवस्था है। बावजूद इसके रेल मिल में 23 जनवरी को जहां दुर्घटना हुई थी। वहां, फोरबिडेंस नहीं, बल्कि शटडाउन लेना जरूरी था।

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घटना घट जाने के बाद करते हैं कार्यक्षेत्र में बदलाव

संयंत्र में दुर्घटनाजन्य क्षेत्र होना आम बात है। इसे सुरक्षित करने के लिए कर्मियों के द्वारा बात उठाने के बावजूद उस कार्य क्षेत्र में बदलाव न करना भी आम बात है। किंतु जैसी ही दुर्घटना हो जाती है। आनन-फानन में कार्यक्षेत्र में सुधार करने की कोशिश शुरू हो जाती है।  ऐसा ही मंज़र रेल मिल के टेल्फर एरिया में भी दिखा। दुर्घटना घट जाने के बाद टेल्फर वाले क्षेत्र को रोशनी से जगमगा दिया गया, जबकि आए दिन यहां काम करने वाले कर्मी कम रोशनी की शिकायत करते रहे हैं। किंतु तब पर्याप्त रोशनी का इंतजाम नहीं किया जाता था।

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सीटू ने उठाया सुपरविजन का मामला

सीटू की टीम ने मुख्य महाप्रबंधक से चर्चा के दौरान कहा कि ठेका श्रमिकों को काम कौन बताता है। उनके द्वारा किए जा रहे काम का सुपरविजन कौन करता है? जिस साइट पर एक्सीडेंट हुआ है, क्या वहां चार्जमैन नहीं था? इसके जवाब में मुख्य महाप्रबंधक ने कहा कि एक ही बीएसपी का कर्मी सुपरविजन कर रहा था और वह कर्मी तीन जगह काम देख रहा था।

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मौजूदा समय में रेल मिल के अंदर सुपरविजन करने के लिए चार्जमैन नहीं है। ज्ञात हो कि नॉन एग्जीक्यूटिव प्रमोशन पॉलिसी लागू होने के बाद संयंत्र के अंदर लगभग सभी विभागों में चार्जमैन के पद समाप्त करते जा रहे हैं, जिस पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है।

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